॥ श्रीहरिः ॥
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निकुंज रस

निकुंज रस
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भगवान ने कहा है “धर्मसंस्थापनार्थाय”। धर्म लोक हित की ओर है। ज्ञान और भक्ति के माध्यम से जीवन में शांति, सेवा और सद्भावना का प्रकाश बढ़ सकता है।

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