॥ श्रीहरिः ॥
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charan das vani
विषय सूची
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श्रीस्वामी राधाप्रसाद देवजू द्वारा वन्दना
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श्री ललिता हरिदास निज, (कुण्डलिया )
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निकुँज महल सोभा वरनन (दोहा)
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महल निकुँज मंजु, उपमा (कवित्त)
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प्रीतम रसिक बिहारिन रानी। (चैपाई)
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मैंन रंगे भोये दोउ, सोवत (कवित्त)
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मत्त मधुप प्रात ही, प्रसंसित (कवित्त)
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रूप चहल पहल मची कुसुमित (कवित्त)
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मची रूप उत्सव की धूम। (चैपाई)
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उठकैं कंज तलप आज दम्पति (कवित्त)
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हरिदासी सिंगार बनायौ। रोचक (चैपाई)
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मंजन कर नव निकुँज, बैठे (कवित्त)
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आज कदलि कंज, मिथुन (कवित्त)
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लाड़ भरी रूप रस रंगभरी, (पद)
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इनकी निपट विकट अटपटी। (चैपाई)
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प्रिया मेरौ मन पलकन सौं भीजै। (पद)
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अनिमिष रूप माधुरी चहैं। (चैपाई)
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हौं तौ तुव रूप लुभानौं प्यारी। (पद)
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हौं तौ तुव बैंनन मोही, हो (पद)
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इतहि निरन्तर इनकी घूरन। (चैपाई)
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तिय पिय रूप निदान री, देखे (पद)
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वानिक बन्यौ बना अरु बनी। (चैपाई)
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होड़ ही परी है किधौं, परी (कवित्त)
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किधौं चन्द्र चन्द्रिका, ये किधौं (कवित्त)
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दोउ कह्यौ कह्यौ करैं अपने (कवित्त)
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अब यह सुनौं नेह गति बाँकी। (चैपाई)
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तोसी तू ही है मेरी प्यारी। (पद)
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कबहूँ हरसौंही कबै छोभित (कवित्त)
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मेरी जोरी परम सलौंनी। (पद)
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जी प्यारी जी, म्हाँसूं, हँसि हँसि (पद)
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यह सुनि अलि आनन्द अति (चैपाई)
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स्यामा सुखदाई स्याम सुख (कवित्त)
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छै जी मृगानैंनी थारौ जोवन जोर।(पद)
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हींडौ महल बाँटे प्यारी, आंमनैं (पद)
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किसोरी अपनी ही दिस हेर। (पद)
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अजू क्यौं न कहौ मन की बतियाँ। (पद)
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दोउ नेह नद, दोउ कंज (कवित्त)
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देखि री अद्भुत समान यह (पद)
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रंग बढ़्यौ प्यारी पिय पाय। (चैपाई)
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अब इनके कौतिक को कहै। (चैपाई)
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दिपति दिवारी यह कौतिक जुत (पद)
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अद्भुत सोभन कुँज कुटीरं। (पद)
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पिय सुठि कोविद केलि कलोलं। (पद)
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विथकित चरित विलोकि अनंगे। (पद)
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विजयति मनमथ कुँज निकेतं। (पद)
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कबहूँ रति बातन में उरझैं। (चैपाई)
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कबहूँ चन्द्रिका चहैं, फटकमनि उर (छप्पय)
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कबहूँ करैं सैर फुलवारि। (चैपाई)
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सचैं सुलप संगीत स्याम, (छप्पय)
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जयति श्री रसिक बिहारी बिहारिन, (पद)
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सकै कौंन कहि कुँज निकाई। (चैपाई)
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गजगति भूल्यौ देखि, मानस (कवित्त)
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नवल निकुँज छवि पुँज, (कवित्त)
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रस को निकेत, मीनकेत (कवित्त)
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फटिक भौंन प्यारी छवि पाई। (चैपाई)
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परस्पर चन्द्र आनन सुपस्यत (पद)
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वसे दोउ विमल जुन्हैया कुँज। (पद)
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सरद निस स्वामिनी स्याम दोउ (पद)
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हँसि हँसि नैंन सैंन जब करैं। (चैपाई)
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चढ़ कैं सरद चन्द कियौ है (कवित्त)
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रूप उज्यारी री अलकलड़ी (पद)
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अंकमाल छवि कैसें कहै। (चैपाई)
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विधे छैल प्यारी सर नैंन। (चैपाई)
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फूली फुलवारी ठौर त्रिविधि (कवित्त)
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प्यारौ मोह्यौ री प्यारी तेरे (पद)
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सहचरि कहत प्रिया सुनि लीजै। (चैपाई)
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सरन सुढारे मतवारे रतनारे (कवित्त)
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मुसक चितौंन चाहि, हाथ गहि (कवित्त)
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सफल भई है आज उज्वल (कवित्त)
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चहल पहल मची महल निकुँज (कवित्त)
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कुँज उजियारी रस लूटत बिहारी (कवित्त)
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कुँज छवि पुँज मंजु गूँजत अलिन्द (कवित्त)
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जमुना कैं तीर छवि तरुन (कवित्त)
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उरझी है अलक बिहारी प्यारी (कवित्त)
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जी म्हारौ साँवरौ कुँवर (पद)
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कृतं सुरति सुख केलि जुग (पद)
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सहचरि चकित रही तिहिं ठौर। (चैपाई)
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खसे सीस फूल बैंना, बेसर (कवित्त)
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मैंन रंग भोये मिलि सोये सुख (कवित्त)
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मैंन रंग भोये मिलि सोये हैं (कवित्त)
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सोये दोउ कंज नैंन मृगनैंनी। (पद)
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जो सुख यह दम्पति मिलि करैं। (चैपाई)
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ललिता हरिदासी अली, इन (छप्पय)
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ललिता हरिदासी अली,यह (कुण्डलिया )
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सोभा रंगमहल कहै कौंन। (चैपाई)
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समता दऊँ काम हू के धाम (कवित्त)
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दम्पति हित बतियन पै ढरिवौ। (चैपाई)
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तिय पिय प्रेम बावरे चीने। (चैपाई)
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अलकलड़ी पिय प्यारी, प्यारौ (पद)
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अब दर्पन देखन कों लगे। (चैपाई)
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अब देखन फुलवारी चले। (चैपाई)
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बहुर्यौ जावक लई बनाय। (चैपाई)
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जावक देत पगन, दुरावत (पद)
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बहुर्यौ दर्पन मन्दिर गये।कहिय (चैपाई)
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तरवनि रति मूरति कों रची। (चैपाई)
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करिकैं सिंगार चारु दर्पन नवकुँज (कवित्त)
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जुटे दोउ रति रन के खेत। (चैपाई)
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अब चैपर की बाजी रची। (चैपाई)
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लालन हम जीते चैपर होड़। (पद)
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तब तौ पिय सकुचन में परे। (चैपाई)
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मिट्ठा बोला ढोल नये हा गायानी। (पद)
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हैं ये दोउ कोउ अद्भुत (पद)
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वरनूँ अबै व्याह की रीत। (चैपाई)
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रंगभीनौं नगीनौं बनी कर कौ, (सवैय्या)
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पट भूषन वेस सुदेस बन्यौ लखि, (सवैय्या)
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मद बाढ्यौ बनी की मनी कौ (सवैय्या)
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कल कौतिक कैसें कहूँ सजनी, (सवैय्या)
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चटकीलौ सुचंचल चाड़ भर्यौ, (सवैय्या)
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अति ऐंड भर्यौ धरै पैंड गनैं, (सवैय्या)
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हौं तौ वारी बिहारी की माधुरी पै, (सवैय्या)
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अली बंक ही भौंहैं कसी हैं तनी, (सवैय्या)
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जब प्यारी सिर बाँधी मौरी। (चैपाई)
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कैधौं हरियाली लता बलित (कवित्त)
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छवि की छटा है किधौं रूप (कवित्त)
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दुहुँन अंजुलिन दीने फूल। (चैपाई)
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दोउ लाल लड़ैंती गाइये। (पद)
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गान तान की बँधि गई घटा। (चैपाई)
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काैंन देव पूजे तुम लला। (चैपाई)
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नागरि बड़ भागन पिय पायौ। (चैपाई)
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अब लागी न्यौछावरि हौंन। (चैपाई)
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खम्माजी खम्माजी थानैं, घणां जी (पद)
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सेज डली रगमगिया दम्पति, (पद)
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बिजई सकल नागरी नाह। (चैपाई)
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हे देखौ है सहेल्यौ, पिय प्यारी जू (पद)
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किहूँ सुख निधि री प्रेम पहेली, (पद)
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सखी रंग झर लगि रह्यौ, (पद)
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कैसें वरनौं इनकी रीत। अरु (चैपाई)
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कुसुमित निकुँज कल केलि कौतिक (पद)
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यौं दोऊ रति सुख सुरझे जबै। (चैपाई)
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तिय तन ओप अनंग सु अति (पद)
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तकि छवि छकि थकि जकि चकि (चैपाई)
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अब स्फटिक मनि मण्डल आये। (चैपाई)
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दोउ प्रवीन बीन लइ हाथ। (चैपाई)
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रंगमहल कलगान करैं, संग दोऊ (पद)
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प्यारी करि कैं गान कलोल। (चैपाई)
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हा हा प्यारी मोहि वही तान (पद)
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प्रान प्रिया अब क्यौं तरसावौ। (चैपाई)
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लैहु री वलैय्या गाय गाय तान (पद)
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कबहूँ प्रेमवस दृग जल भरैं। (चैपाई)
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प्यारी पै नट ह्वै कैं नचै। (चैपाई)
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स्यामा प्यारी ऐसा चेटक लगाया (पद)
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अब प्रिया करन गान जब लगी। (चैपाई)
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नृतत गति कैसी विधि कहूँ। (चैपाई)
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सचैं सुलप संगीत स्याम, स्यामा (छप्पय)
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वेदन मैं साम, त्यौं पुरानन (कवित्त)
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भजि श्री हरिदास बिहारी जू। (पद)
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भजि नवल किसोर किसोरी जू। (पद)
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पाय रहस्य की बात, व्यास (छप्पय)